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शिमला नगर निगम के वार्ड 34 से 41 करने के निर्णय को निरस्त करने के फैसले का स्वागत

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शिमला जन 25
भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व बीजेपी की सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम,1994 में संशोधन कर शिमला नगर निगम के वार्ड 34 से 41 करने के निर्णय को निरस्त करने के फैसले का स्वागत करती है तथा सरकार से मांग करती है कि चुनाव प्रक्रिया की सभी औपचारिकताओं को पूर्ण कर नगर निगम शिमला के चुनाव शीघ्र करवाएं जाए। पार्टी मांग करती है कि पूर्व बीजेपी साकार द्वारा जो शिमला शहर में रहने वालों को वोट के अधिकार से वंचित रखने के लिए जो संशोधन किया है तथा *हिमाचल प्रदेश नगर निगम चुनाव(संशोधन) नियम, 2022 बनाया है उसे भी निरस्त किया जाए तथा देश के जन प्रीतिनिधित्व अधिनियम,1950* के तहत जो भी मतदाता योग्य है उसे मत का अधिकार प्रदान किया जाए। इससे लोकतन्त्र मज़बूत होगा और प्रत्येक शहरवासी को अपनी स्थानीय सरकार चुनने का अधिकार प्राप्त होगा।
पूर्व में बीजेपी सरकार द्वारा सरकार के विरुद्ध जनाक्रोश के चलते व नगर निगम शिमला पर अपना कब्ज़ा बनाए रखने के लिए सत्ता का दुरुपयोग कर *हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम,1994* में मनमाने व अलोकतांत्रिक तरीके से संशोधन कर अनावश्यक ही वार्डो का परिसीमन कर इनकी संख्या 34 से बढ़ाकर 41 की गई तथा वार्ड परिसीमन के लिए तय नियमों को तोड़कर मनमाने तरीके से अपनी सुविधानुसार बनाया था। सरकार की इस अलोकतांत्रिक कार्यवाही का जनता ने विरोध किया था। पार्टी ने इस आलोकतांत्रिक निर्णय को सरकार व राज्य चुनाव आयोग से पुरजोर तरीके से उठाया था तथा इन संशोधनों को निरस्त करने की मांग की गई थी। इसके पश्चात उच्च न्यायालय में सरकार की परिसीमन की इस प्रक्रिया को चुनौती दी गई तथा उच्च न्यायालय ने भी पुनर्सिमांकन पर विचार करने के आदेश परित किए। परन्तु सरकार ने इस पर भी अमल नहीं किया। चुनाव में हार के डर से सरकार ने इस अलोकतांत्रिक कार्यवाही से नगर निगम शिमला के चुनाव को टालकर जनता को उनके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित किया।
पार्टी का मानना है कि शिमला में वार्डों की संख्या में वृद्धि का कोई भी औचित्य नहीं है क्योंकि इससे जनता को कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं मिलेगी। सरकार की नीति के चलते नगर निगम में भर्तियों पर पूर्णतः रोक लगी हुई है और आज यदि देखा जाए तो नगर निगम शिमला में 1984 में जब वार्डों की संख्या 17 थी उस समय के अनुसार कर्मचारियो के कैडर में आज भी 1000 से अधिक पद विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े हैं जबकि आज शहर की आबादी में तीन गुणा से अधिक वृद्धि हुई है। पहले प्रत्येक वार्ड में जहां 20 से 25 कर्मचारी कार्यरत थे अब वहां 2 से 3 कर्मचारी भी मुश्किल से कार्य कर रहे हैं और कई वार्ड तो ऐसे हैं जहां दूसरे वार्डो से कर्मचारियो को बदल कर ही काम चलाया जाता है। इससे जनता को दी जानें वाली सेवा भी प्रभावित हो रही है और कर्मचारियो पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और उनका शोषण किया जा रहा है। बार बार मांग के बावजूद पूर्व में बीजेपी सरकार द्वारा नगर निगम शिमला में कोई भी नई भर्ती नही की गई। जिससे सेवाएं बूरी तरह से प्रभावित हो रही है। गत 5 वर्षो में पूर्व बीजेपी सरकार व नगर निगम शिमला द्वारा जो नीतियां लागू की गई उससे सेवाओं व संपतियों के निजीकरण के साथ साथ पानी, प्रॉपर्टी टैक्स, कूड़ा उठाने की फीस व अन्य सेवाओं की दरों में वृद्धि कर जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के अतिरिक्त कोई भी कार्य नही किया।
सीपीएम सरकार द्वारा लागू की जा रही निजीकरण व आम जनता पर आर्थिक बोझ डालने वाली नीतियों को बदलकर शिमला शहर के वास्तविक स्वरुप को बचाने व विकास की दिशा आम जनता के हित में करने के लिए अपने प्रयास जारी रखे है तथा इन नीतियों को जनहित मे बनाने के लिए जनता के साथ मिलकर संघर्ष जारी रखेगी।

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