लालबत्ती के बजाय साहबो ने लगाए फ्लैशर सीएम बोले होगी जांच
शिमला: प्रदेश में वीवीआईपी कल्चर को खत्म करने के चक्कर में सरकार ने अफसरों व विधायकों के वाहनों से लालबत्ती लगाने का कल्चर समाप्त कर दिया था जिसके चलते सुबह में किसी भी विधायक या किसी भी अधिकारी के वाहन पर लालबत्ती नहीं होती थी लेकिन कोरोना आपदा के काल में सूबे के साहबों ने आपदा प्रबंधन की आड़ में चुपचाप वीआईपी कल्चर अस्तित्व में ला दिया है और अपने वाहनों पर लालबत्ती के बजाय लकदक करते फ्लैशर लगा लिए हैं।
वाहनों पर फ्लैशर लगाने वालों में जिला स्तर के अधिकारी नहीं बल्कि उपमंडल और तहसील स्तर के अधिकारियों ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए हैं। कानूनन प्रदेश का कोई भी अधिकारी अपने वाहन पर न तो लालबत्ती लगा सकता है और न ही फ्लैशर का उपयोग कर सकता है लेकिन सूबे में कोरोना काल में पाबंदियां आयत होने के बाद अधिकारियों में फ्लैशर लगाने का चलन शुरू हुआ जो लगभग पूरे प्रदेश में फैल गया है।
पालमपुर में भी एसडीएम पालमपुर, डीएसपी पालमपुर तथा तहसीलदार पालमपुर के फ्लैशर लगे वाहन पिछले करीब डेढ़ साल से सड़कों पर घूम रहे हैं। एसडीएम बैजनाथ के वाहन पर भी इसी प्रकार की लालबत्ती देखी जा सकती है। अफसरशाही में बढ़ते वीआईपी कल्चर की गूंज आज विधानसभा में भी सुनाई दी। यह मामला नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने उठाया, जिस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि रैड फ्लैशर लाइट को लगाने संबंधी किसी तरह की अनुमति सरकार के स्तर पर नहीं दी गई है। इसके बावजूद यदि किसी ने ऐसा किया है तो मामले की जांच होगी।

