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एक छोटे गांव से उद्यमिता की बड़ी उड़ान, 20 लीटर से 800 लीटर प्रतिदिन तक का सफर

प्रदेश सरकार के सहयोग से मिला आगे बढ़ने का अवसर – कविता शर्मा

शिमला 20 सितंबर –
शिमला जिला के विकास खंड छौहारा के थाना (जांगला) क्षेत्र की कविता शर्मा ने मेहनत, आत्मविश्वास और उद्यमशीलता के बल पर ग्रामीण क्षेत्र में सफल दुग्ध प्रसंस्करण इकाई स्थापित कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष 2025 में महज 20 लीटर प्रतिदिन दूध के प्रसंस्करण से शुरू हुआ उनका उद्यम आज करीब 800 लीटर प्रतिदिन दूध का प्रसंस्करण कर रहा है। वर्तमान में इकाई के माध्यम से घी, पनीर, दही और मक्खन जैसे विभिन्न दुग्ध उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
कविता शर्मा का यह उद्यम आज उनके लिए आजीविका का मजबूत साधन बनने के साथ-साथ क्षेत्र की 100 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादकों के लिए नियमित बाजार का माध्यम भी बन गया है। सरकारी योजनाओं, स्वयं सहायता समूह और निरंतर प्रयासों से उन्होंने एक छोटे प्रयास को व्यवस्थित उद्यम में बदलने में सफलता हासिल की है।

स्वयं सहायता समूह से मिली पहली पहचान
कविता शर्मा वर्ष 2020 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें खाद्य प्रसंस्करण और उद्यमिता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला। सरस मेले, दिल्ली हाट, अंतर्राष्ट्रीय शिमला समर फेस्टिवल और स्थानीय मेलों में खाद्य उत्पादों के स्टॉल लगाने के दौरान उन्होंने ग्राहकों से सीधे संवाद किया तथा बाजार की मांग, उत्पादों की गुणवत्ता, प्रस्तुति और विपणन के बारे में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
इन अनुभवों ने उनके भीतर अपना उद्यम शुरू करने का आत्मविश्वास पैदा किया। मेलों में ग्राहकों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया से उन्हें यह विश्वास हुआ कि स्थानीय संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्र में भी एक सफल एवं टिकाऊ व्यवसाय स्थापित किया जा सकता है।

अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ दुग्ध प्रसंस्करण उद्यम
अपने अनुभव को व्यावसायिक अवसर में बदलते हुए कविता शर्मा ने अक्टूबर 2025 में एसएचजी नंदला के माध्यम से दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद प्रसंस्करण इकाई की शुरुआत की। प्रारंभिक दौर में संसाधन सीमित थे और इकाई में प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का ही प्रसंस्करण किया जाता था।
उद्यम को विस्तार देने के लिए आधुनिक मशीनरी, बेहतर प्रसंस्करण व्यवस्था और पैकेजिंग सुविधाओं की आवश्यकता थी। सीमित वित्तीय संसाधन विस्तार की राह में एक प्रमुख चुनौती थे। ऐसे समय में सरकारी योजना से मिली सहायता उनके उद्यम के विकास में महत्वपूर्ण साबित हुई।

पीएमएफएमई से मिली सहायता
कविता शर्मा को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (PMFME) के अंतर्गत 7 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस सहायता से उन्हें आवश्यक मशीनरी और उपकरण स्थापित करने में मदद मिली तथा छोटे स्तर पर शुरू किए गए उद्यम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर मिला।
इकाई में बीएमसी, बैच पाश्चराइजर, होमोजेनाइजर, कल्चर टैंक, हॉट रूम, क्रीम सेपरेटर, कोएगुलेशन टैंक, फिलिंग मशीन, वैक्यूम पैकेजिंग मशीन, डी-फ्रीजर और मडानी जैसी आधुनिक मशीनरी स्थापित की गई। इन सुविधाओं से दूध के प्रसंस्करण की क्षमता, गुणवत्ता और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

20 लीटर से 800 लीटर प्रतिदिन तक का सफर
आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ कविता शर्मा ने अपने उद्यम का तेजी से विस्तार किया। अक्टूबर 2025 में करीब 20 लीटर प्रतिदिन से शुरू हुई इकाई सितंबर 2026 तक लगभग 800 लीटर दूध प्रतिदिन का प्रसंस्करण करने लगी है। लगभग 11 महीनों में प्रसंस्करण क्षमता में हुआ यह विस्तार उनके निरंतर प्रयासों और उद्यम के प्रति समर्पण को दर्शाता है। वर्तमान में उद्यम का अनुमानित वार्षिक कारोबार लगभग 70 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

दुकान-दुकान जाकर बनाया बाजार
उद्यम स्थापित करने के साथ उत्पादों के लिए स्थायी बाजार तैयार करना भी एक बड़ी चुनौती थी। कविता शर्मा ने इस चुनौती का सामना स्वयं आगे बढ़कर किया। उन्होंने स्थानीय दुकानदारों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया और दुकान-दुकान जाकर अपने उत्पादों का प्रचार किया।
ग्राहकों से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से विभिन्न मेलों में भाग लेने के दौरान प्राप्त अनुभव भी उनके लिए बाजार विकसित करने में उपयोगी साबित हुआ। निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप उनके उत्पादों ने रोहड़ू, चिड़गांव और जुब्बल सहित आसपास के बाजारों में अपनी पहचान बनानी शुरू की है।

100 से अधिक महिलाओं को मिला नियमित बाजार
कविता शर्मा के उद्यम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि इसका स्थानीय महिला दुग्ध उत्पादकों पर पड़ने वाला सकारात्मक प्रभाव है। वर्तमान में आसपास के क्षेत्रों की 100 से अधिक महिलाएं प्रतिदिन इस इकाई को दूध उपलब्ध करवा रही हैं।
दूध की नियमित खरीद के एवज में इन महिला दुग्ध उत्पादकों को लगभग 7 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा है। इससे महिलाओं को अपने ही क्षेत्र में दूध के लिए नियमित और भरोसेमंद बाजार उपलब्ध हुआ है। साथ ही, स्थानीय पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने के साथ ग्रामीण परिवारों की आय को भी सहारा मिल रहा है।

दो स्थानीय महिलाओं को मिला रोजगार
उद्यम के विस्तार के साथ दो स्थानीय महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार का अवसर भी मिला है। इससे उन्हें नियमित आय का साधन प्राप्त हुआ है और ग्रामीण क्षेत्र में महिला आत्मनिर्भरता तथा रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिला है।
कविता शर्मा अपने पति के साथ मिलकर भी उद्यम के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। परिवार की भागीदारी और स्थानीय महिलाओं को रोजगार देकर यह इकाई ग्रामीण स्तर पर सामूहिक आर्थिक गतिविधि का माध्यम बन रही है।

घी, पनीर, दही और मक्खन किए जा रहे तैयार
वर्तमान में इकाई में घी, पनीर, दही और मक्खन जैसे विभिन्न दुग्ध उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की मांग लगातार बनी हुई है। कविता शर्मा के अनुसार वर्तमान उत्पादन क्षमता के बावजूद वह बाजार की पूरी मांग को पूरा नहीं कर पा रही हैं।

प्रदेश सरकार के सहयोग से मिला आगे बढ़ने का अवसर – कविता शर्मा
कविता शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों से महिलाओं को आगे बढ़ने के नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें दिल्ली हाट, अंतर्राष्ट्रीय शिमला समर फेस्टिवल, सरस मेले और अन्य स्थानों पर अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिला, जिससे उन्हें बाजार और विपणन की समझ के साथ-साथ अपनी आय बढ़ाने में भी मदद मिली।
उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर से ही उनका सपना अपना उद्यम शुरू करने का था। प्रदेश सरकार, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना के सहयोग से उन्हें दुग्ध उत्पाद निर्माण की इकाई स्थापित करने का अवसर मिला।
कविता शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपने उद्यम की शुरुआत केवल 20 लीटर प्रतिदिन दूध के प्रसंस्करण से की थी, जो करीब 11 महीनों में बढ़कर 800 लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादों की बाजार में काफी मांग है, लेकिन वर्तमान क्षमता से वह पूरी मांग को पूरा नहीं कर पा रही हैं। आने वाले समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने अपने उद्यम को आगे बढ़ाने में सहयोग के लिए प्रदेश सरकार, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और PMFME योजना का आभार व्यक्त किया।

व्यक्तिगत सफलता से सामूहिक सशक्तिकरण तक
कविता शर्मा की कहानी एक छोटे ग्रामीण उद्यम को बड़े अवसर में बदलने की प्रेरणादायक मिसाल है। स्वयं सहायता समूह से मिले अनुभव, सरकारी योजनाओं से प्राप्त सहयोग, आधुनिक तकनीक और निरंतर मेहनत के बल पर उन्होंने 20 लीटर प्रतिदिन से शुरू हुए अपने उद्यम को लगभग 800 लीटर प्रतिदिन दूध के प्रसंस्करण तक पहुंचाया है।
आज उनका उद्यम न केवल उनके परिवार के लिए आजीविका का साधन है, बल्कि 100 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादकों को नियमित बाजार और दो स्थानीय महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी उपलब्ध करवा रहा है। यह पहल दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों, महिला सहभागिता, सरकारी सहयोग और उद्यमशीलता के समन्वय से आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी जा सकती है

Samagra Sikhsha

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