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प्रधान सचिव के आश्वासन पर स्थगित किया अनशन, प्रधान मुख्य अरण्यपाल का घेराव होगा

पौधे लगाने के लिए नहीं एक भी पुरस्कार

हिमाचल प्रदेश वन  विभाग मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन शिमला इकाई के प्रधान प्रकाश बादल ने वन विभाग द्वारा पुरस्कार वितरण में हुई धांधली को लेकर अनशन  को प्रधान सचिव ओंकार शर्मा के आश्वासन के बाद स्थगित किया है | यह जानकारी प्रकाश बादल ने एक ताज़ा प्रेस कांफ्रेस को संबोधित करते हुए दी | प्रकाश बादल ने बताया कि उनकी एसोसिएशन प्रधान सचिव से पुरस्कारों में हुई धांधली को लेकर उनसे मिलने गयी थी | ओंकार शर्मा ने एसोसिएशन को विश्वास दिलाया कि वो इस सम्बन्ध में उचित कार्रवाई करेंगे| इसके बाद शिमला वन विभाग मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन ने अपनी कार्यकारिणी की बैठक में निर्णय लिया कि प्रधान सचिव के आश्वासन का आदर करते हुए प्रधान सचिव की कार्रवाई होने तक यह अनशन टाल दिया जाए | इसके पश्चात बादल ने यह भी बताया  कि अनशन के स्थगन के साथ साथ पी सी सी एफ के दफ्तर के घेराव की निर्धारित 9 अगस्त की तारीख में भी बदलाव किया जा रहा है | ऐसा  इसलिए किया गया है कि 9 अगस्त को राजपत्रित अवकाश है और कार्यालय इस दिन बंद रहेगा, इसलिए पी सी सी एफ के कार्यालय के घेराव की तिथि जल्द ही साझा की जाएगी | बादल ने बताया कि जब तक वर्तमान में दिए गए पुरस्कार वापस नहीं लिए जाते, और पूरे प्रदेश से आवेदन ले कर दोबारा स्क्रूटिनी नहीं की जाती, तब तक आन्दोलन की राह से पीछे नहीं हटेंगे | उन्होंने वन मंत्री राकेश पठानिया पर भरोसा जताते हुए बताया कि अति व्यस्ततम होने के कारण वन विभाग की अफसरशाही वन मंत्री को गुमराह करके मनमर्जी कर रही है | प्रकाश ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि वन विभाग में अनेक वन कर्मी/भटकाऊ  अधिकारी ऐसे हैं, जो पुरस्कारों के असली हकदार हैं | प्रकाश बादल ने आगे बताया कि हिमाचल वन विभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल (हॉफ) मीडिया को भ्रामक और हास्यास्पद है| एक बयान में वो ये कहते हैं कि पुरस्कार वीरता के लिए नहीं हैं, दूसरे तरफ पुरस्कारों की सूचि पर जाएं तो सर्वोत्तम पुरस्कार दो व्यक्तियों को दिए गए हैं जो बहादुरी के लिए दिए जाते हैं | यह नियम  पुरस्कारों की पॉलिसी में नियम नंबर  पांच पर स्थित हैं | इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पी सी सी एफ हाल ही के पुरस्कारों के चयन में हुई अपनी गलती को छुपाने के लिए लीपापोती कर  रहे हैं | प्रकाश बादल ने बताया कि वर्तमान में मौजूदा पॉलिसी के अंतर्गत वन विभाग के डी एफ ओ से वन रक्षक तक के  कर्मचारियों एवं अधिकारियों को ही पालिसी में शामिल किया गया है, और विभाग में मौजूद अन्य  वर्गों  के कर्मचारियों और अधिकारियों को पालिसी में शुमार नहीं किया गया ही | प्रकाश ने बताया कि इस पासिसी में वन विभाग के सभी वर्गों को जब तक जोड़ा नहीं गया, तो अपना आन्दोलन जारी रखेंगे | उन्होंने हिमाचल प्रदेश वन विभाग के  फील्ड स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी वर्ग,ड्राईवर एसोसिएशन, तकनीकी स्टाफ एसोसिएशन, तथा पर्सनल स्टाफ एसोसिएशन से आवाहन किया है कि जल्द ही वो पी सी सी एफ कार्यालय के घेराव की तारीख की घोषणा करेंगे, उस तारीख को पूरे हिमाचल से वन विभाग के हर वर्ग के कर्मचारी शिमला पहुँच कर पी सी सी एफ का घेराव करें ताकि पुरस्कारों की नई पालिसी बन सके और वन विभाग का हर वर्ग पुरस्कारों का हक़दार हो | बादल ने प्रदेश वन विभाग के ड्राइवरों से विशेष आवाहन किया और बताया कि घेराव की तारीख को कोई भी वन विभाग का ड्राइवर गाडी न चलाए और घेराव के लिए शिमला पहुँच कर एसोसिएशन का साथ दें |

प्रकास बादल ने बताया कि वो कई वर्षों से वन विभाग में कार्य कर रहे हैं और वो अनेक ऐसे कर्मियों / अधिकारियों को विशेष रूप से जानते हैं, जिन्होंने वन विभाग के लिए उत्कृष्ट कार्य तो किया लेकिन उनके लिए न कोई पुरस्कार तय हो पाया, न ही कोई पालिसी तैयार की गयी | इस उत्कृष्ट लोगों की अनदेखी आज भी जारी  है और ये घुट-घुट कर नौकरी कर रहे हैं| ऐसे अनेक कर्मचारी और अधिकारी तो सेवानिवृत्त भी हो गए हैं लेकिन विभाग में उनकी प्रतिभा का लाभ उठाना ज़रूरी भी नहीं समझा | प्रकाश बादल ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में पीसीसीएफ (वाईल्ड लाईफ) राजीव कुमार की तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता जिन्होंने चंद महीनों में ही प्रदेश के वन्यप्राणी विंग को पेपर लैस करके एक मिसाल कायम कर दी है | हिमाचल प्रदेश वन विभाग का वाईल्डलाईफ विंग पूरी तरह ऑनलाइन करने का श्री राजीव कुमार को जाता है लेकिन विभाग में उनके उत्कृष्ट कार्य पर किसी की नज़र ही नहीं है | नाहन से सी सी एफ के पद से रिटायर बी से राणा ने तो नए वन रक्षकों की एक सक्षम फ़ौज ही तैयार नहीं की बल्कि पौधे लगाने के नए फार्मुलों पर काम किया , ग्रुप पैट्रोलिंग की प्रथा चला कर वन माफियाओं के हौसले प्रदेश भर में  पस्त किये, अपना सब कुछ खपा देने के बाद सेवा निवृत्त होने वाले बी से राणा को किसी ने आज तक कोई सम्मान देने के योग्य नहीं समझा |   इसी प्रकार उपेक्षा का शिकार झेलत हुए वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी देविंदर सिंह ढढवाल के कई वर्षो के योगदान को तो वन विभाग ने पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया है | गौरतलब है कि देविंदर सिहं ढढवाल द्वारा हिमाचल प्रदेश के वन्यप्राणियों से सम्बंधित पांच महत्वपूर्ण पुस्तकों का देश-विदेश में चर्चा है, लेकिन विभाग ने कभी उनके कार्य को नोटिस ही नहीं किया | देविन्द्र ढढवाल ने अपने पैसे से ये संग्रह प्रकाशित किये, लेकिन विभाग ने उसे अपने इस्तेमाल योग्य तक नहीं समझा | गौरतलब है कि देविन्द्र ढढवाल ने  अति विलुप्त होती गिद्ध प्रजाति जिसे अंग्रेज़ी में वल्चर कहा जाता, है के लिए विशेष कार्य किया लेकिन उनका यह उत्कृष्ट कार्य किसी पालिसी में फिट नहीं आया | गौरतलबी है कि देविन्द्र ढढवाल ने कांगड़ा के पौंग डैम में पक्षियों पर विशेष कार्य किया है | लेकिन बावजूद इसके  उन्हें आज तक उनकी विशिष्टता के अनुरूप कार्य नहीं दिया गया और वो वन विभाग के एक प्रोजेक्ट के ऍफ़ डब्ल्यू में कार्य करने पर विवश हैं | इसी प्रकार बादल ने बताया कि कुछेक अधिकारियों ने वन विभाग में कर्मचारियों में  दक्षता लाने और वन विभाग के प्रबंधन में विशेष कार्य किया लेकिन अपने कार्यकाल के दौरान उनकी उत्कृष्टता के लिए उनकी पीठ थपथपाने वाला कोई नहीं था, इनमे बी एस राणा का नाम प्रमुख था जो नाहन से अरण्यपाल के पद से सेवा विवृत्त हुए हैं |  वन विभाग में कई वर्षों से एफ सी ए केस निपटा रही एक निपुण और वरिष्ट अधीक्षक जय श्री जी को तो विभाग   इस तर्ज पर नकारता आया है कि एक क्लर्क के उत्कृष्ट कार्य के लिए कोई पॉलिसी है ही नहीं | गौरतलब है कि जय श्री वन विभाग के मुख्यायालय में इकलौती ऐसी अधीक्षक हैं जिनके कार्यालय में न होने पर एफ सी ए का कार्य ठप्प पड़ जाता है | संजीवा पांडे का ग्रेट हिमालय नेशनल पार्क में किये गए कार्य को भी अधिक पहचान न मिल पाई और अपनी सेवा निवृत्ति के बाद उनके काम को पहचान उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तक ने दिलाई | इसी प्रकार  कल्याण शकतान द्वारा  वन विभाग क़ानून पर महत्वपूर्ण संग्रहों के लिए उनके योगदान को भी कोई मान्यता नहीं मिली और वो अधिकतर विभागीय हाशिये का शिकार रहे |  ऐसे ही एक उत्कृष्ट अधिकारी सतीश गुप्ता के कार्य को भी हमेशा अधिक महत्ता नहीं दी गयी | सतीश गुप्ता ने  अनेक वन रक्षकों को वाइल्ड लाईफ के गुर  सिखाए और अनेक मनमोहक चित्रों से विभाग को एक अलग पहचान दिलाई| वन विभाग के आकर्षक लोगों को भी सतीश गुप्ता द्वारा डिजाईन किया गया, लेकिन उनकी उत्कृष्टता भी विभागीय पालिसी में न समा सकी |  बादल ने अपने वक्तव्य में  खेद व्यक्त करते हुए बताया कि वाईल्ड लाईफ शिमला के वन मंडल अधिकारी ने जहां एक तरफ एक ही कार्यालय से चार कर्मियों इनामों की सिफारिश कर दी वहीं उनके अधीन थरोच रेंज में कार्यरत वन परिक्षेत्राधिकारी प्रेम मेहता की वो आँख नज़र नहीं आई जिसकी रौशनी रात को जंगलों में नाजायज़ सडक बनाने वाले माफियाओं से लड़ते हुए  हमेशा के लिए चली गयी | चंबा का गार्ड  सुनील कुमार भी वन विभाग की पुरस्कार पालिसी में शामिल न हो सका | गौरतलब है कि चंबा में अवैध लकड़ी की तस्करी को रोंकने वाले गुज्जर समुदाय के लोगों से बहुत वीरता के साथ लड़ते हुए सुनील कुमार ने भी अपनी एक आँख की रौशनी गँवा दी लेकिन अभी भी सुनील कई तरह के ज़हरीले साँपों का रेस्क्यू करने में माहिर है| परन्तु चमचों को पुरस्कार देने में मशगूल वन विभाग की नज़र सुनील कुमार तक नहीं पहुँच सकी | हिमाचल प्रदेश मिनिस्त्रियुअल स्टाफ ने इस पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए बताया को वो पालिसी में सभी वर्गों के लिए व्यवस्था करवाएंगे और असली हकदारों को पुरस्कार दिलवा कर ही दम लेंगे |

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