IGMC में टैंडर देने में धांधली, जानें पूरा मामला
सिक्योर गार्ड सिक्योरिटी एंड मैनपावर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड जिसको IGMC शिमला का सिक्योरिटी टेंडर पहली अक्टूबर 2023 से दिया गया है, वह 12 सितंबर 2020 को रजिस्टर हुई एक निजी कंपनी है। इसे गैर-सरकारी कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया गया है और कंपनी रजिस्ट्रार, चंडीगढ़ में पंजीकृत है। इसकी अधिकृत शेयर पूंजी रु. 100,000/- और इसकी चुकता पूंजी रु. 100000/-है। यह IGMC शिमला का लगभग चार करोड़ का हर साल का टेंडर है l और बजट घोषणा के तहत इसको सरकार द्वारा खुद करवाया जाना था परन्तु IGMC Shimla प्रशाशन ने इसको अपने स्तर पर ही कर दिया जो की हैरानी वाली बात है l इस कारण सरकार की बजट घोषणा भी निरस्त हो कर रह गयी है और IGMC प्रशाशन ने अपने स्तर पर ही मनमनरजी की टेंडर शर्त रखी हुयी बताई जा रही हैं ऐसा अनुमान है की टेंडर ही संदेह पूर्ण है ?
सिक्योर गार्ड सिक्योरिटी एंड मैनपावर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, इसकी बैलेंस शीट आखिरी बार 31 मार्च 2022 को दाखिल की गई थी। सिक्योर गार्ड सिक्योरिटी एंड मैनपावर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक योगेश राव और राज बाला हैं।
सिक्योर गार्ड सिक्योरिटी एंड मैनपावर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड का कॉर्पोरेट पहचान नंबर (CIN) U74999CH2020PTC043212 है और इसका पंजीकरण नंबर 43212 है। इसका ईमेल पता yogeshao71@gmail.com है और इसका पंजीकृत पता पहली मंजिल, प्लॉट नंबर 151 औद्योगिक क्षेत्र, चरण- 2 चंडीगढ़ है।
आईजीएमसी के 31 सुरक्षा कर्मियों को नौकरी से बाहर निकालने के खिलाफ आईजीएमसी कॉन्ट्रैक्ट वर्करज़ यूनियन सम्बन्धित सीटू ने डीसी ऑफिस शिमला के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी बारिश के बावजूद भी दो घण्टे तक डीसी ऑफिस के बाहर डटे रहे। प्रदर्शन को सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व यूनियन अध्यक्ष देवराज बबलू ने संबोधित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नौकरी से निकाले गए कर्मियों को वापिस नौकरी पर न लिया तो आंदोलन तेज होगा।
प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व यूनियन अध्यक्ष देवराज बबलू ने कहा कि 31 सुरक्षा कर्मियों को नौकरी से बाहर निकालने का निर्णय गैर कानूनी है। इसे तुरन्त वापिस लिया जाए। अगर ऐसा न किया गया तो आईजीएमसी में हड़ताल होगी। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी में सुरक्षा कर्मियों की मानसिक प्रताड़ना की जा रही है। ठेकेदार बदलने पर उन्हें नौकरी से निकाला जा रहा है जोकि यूनियन से आईजीएमसी प्रबन्धन द्वारा किए गए समझौते व औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25 एच का खुला उल्लंघन है। आईजीएमसी प्रबन्धन भी नए ठेकेदार के साथ मिलकर श्रम क़ानूनों की खुली अवहेलना कर रहा है। पिछले कई वर्षों से कार्यरत सुरक्षा कर्मियों की पुनर्नियुक्ति में श्रम कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 25 एच की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नई आउटसोर्स कम्पनी द्वारा जो शपथ पत्र सुरक्षा कर्मियों से लिया जा रहा है, उसमें अनुचित श्रम व्यवहार किया जा रहा है। यह औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के पांचवें शेडयूल व धारा 25 यू का उल्लंघन है। प्रमुख नियोक्ता आईजीएमसी प्रबन्धन द्वारा ठेका मजदूर अधिनियम 1970 की अवहेलना बड़े पैमाने पर की जा रही है। उन्होंने मांग की है कि आईजीएमसी प्रबन्धन द्वारा वार्ड अटेंडेंटों व सफाई कर्मियों की तर्ज़ पर सभी सुरक्षा कर्मियों को नए ठेकेदार के पास पुनर्नियुक्ति दी जाए। उन्होंने चेताया है कि अगर सभी सुरक्षा कर्मियों की पुनर्नियुक्ति न की गई तो आंदोलन तेज होगा।

