Himachal Tonite

Go Beyond News

Jaypee University of Information Technology

निजी कंपनियों के दबाव में सरकार ले रही किसान विरोधी निर्णय

प्रदेश सरकार द्वारा बागवानी विभाग के माध्यम से बागवानों को उपदान पर दिए जा रहे फफूंदीनाशक, कीटनाशक, खाद व पोषक तत्व और अन्य लागत वस्तुओं की आपूर्ति को बंद करने के निर्णय की किसान संघर्ष समिति ने कड़ी निंदा की है साथ ही प्रदेश सरकार से बागवान विरोधी इस निर्णय को जल्द से जल्द वापस लेने की मांग की है । समिति ने बागवानी विभाग के प्रदेश के सभी ब्लॉकों में सब्सिडी पर बागवानों को बेहतर गुणवत्ता की सभी आवश्यक लागत वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर बागवानों को राहत प्रदान करने की भी मांग की है। समिति ने प्रदेश सरकार पर निजी कंपनियों के दबाव में आकर और उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए इस प्रकार के किसान विरोधी निर्णय लेने का आरोप लगाया है।

समिति के महासचिव संजय चौहान ने कहा कृषि व बागवानी के क्षेत्र में दी जा रही सब्सिडी को समाप्त करने से बागवानों को खुले बाज़ार से इन निजी कंपनियों से मनमाने दाम पर खाद, फफूंदनाशक, कीटनाशक, पोषक तत्व व अन्य लागत वस्तुएं लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। आज बाज़ार पर इन निजी कंपनियों का दबदबा व मनमानी कायम है और सरकार इस मनमानी को रोकने में न केवल पूर्णतः विफल रही है बल्कि इसको बढ़ावा देने में भी इन निजी कंपनियों का सहयोग कर रही है। अधिकांश छोटा, सीमांत व मध्यम किसान इन महंगी लागत वस्तुओं को बाज़ार से नहीं खरीद पाता है जिसके कारण प्रदेश में कृषि व बागवानी के क्षेत्र में उत्पादन व उत्पादकता में निरंतर कमी आ रही है। किसानों व बागवानों पर संकट बढ़ने के साथ-साथ इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बागवानी क्षेत्र पर भी बुरा असर पड़ेगा।

उन्होंने निजी कंपनियों पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि दो दिन पूर्व गुजरात की एक कंपनी द्वारा बिना टेस्टिंग और आवश्यक लाइसेंस के बगैर ही खाद के नाम पर अपने उत्पादों को हिमफेड के माध्यम से बेचने के लिए मुख्यमंत्री से लांच करवा दिया गया। संजय चौहान ने कहा कि यह लांच कंपनी के द्वारा बिल्कुल गैर कानूनी रूप से करवाया गया है क्योंकि जब तक किसी भी कृषि व बागवानी के लागत वस्तु का मान्यता प्राप्त विश्विद्यालय या विभाग द्वारा उसका उचित ट्रायल व वह उसके प्रयोग की अनुमति नहीं दे देते तब तक यह उत्पाद न तो बाज़ार में कंपनी बेच सकती है और न ही इसे किसी भी सरकारी या गैर सरकारी एजेंसी या संस्था के माध्यम से इस्तेमाल के लिए किसी को भी बेचा व दिया नहीं जा सकता है। इसके साथ ही कंपनी व एजेंसी या संस्था को प्राधिकृत विभाग से इसको बेचने का लाइसेंस लेना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न जाने किसके दबाव में बिना किसी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किए ही मुख्यमंत्री को गुमराह कर इनसे इन उत्पादों को लांच करवाया गया।

किसान संघर्ष समिति ने इसकी जांच की मांग की है और इसके लिए जो भी दोषी है उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की मांग करने के साथ ही कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर इसकी समस्त गतिविधियों पर रोक लगाने की भी मांग की। समिति ने चेताया कि यदि सरकार तुरंत इस पर कार्यवाही नहीं करती है तो इससे किसानों व बागवानों को करोड़ों रुपये की क्षति होगी और इन अनाधिकृत लागत उत्पादों के इस्तेमाल से प्रदेश में कृषि व बागवानी की करोड़ों रुपए की आर्थिकी को भी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी किसानों को अनाधिकृत रूप से नकली व घटिया खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक, पोषक तत्व, ग्रोथ रेगुलेटर आदि बेचने की शिकायतें किसानों व बागवानों ने की है और कई मामले भी सामने आए हैं। कुछ वर्ष पूर्व इसी प्रकार से सरकार की एक संस्था द्वारा बिना टेस्टिंग के सुपरफॉस्फेट खाद की आपूर्ति करने का मामला सामने आया था जिस पर सरकार ने कार्यवाही कर इस खाद की बिक्री पर रोक लगा दी थी।

इसके अलावा किसान संघर्ष समिति ने सरकार से प्रदेश में कृषि व बागवानी क्षेत्र में चल रहे संकट को देखते हुए तथा किसानों व बागवानों को बाज़ार में निजी कंपनियों के द्वारा की जा रही लूट को रोकने के लिए किसानों व बागवानों को लागत व अन्य वस्तुओं पर ब्लॉक स्तर पर सब्सिडी प्रदान करने की मांग की। समिति ने चेतावनी दी अगर सरकार इन मांगों पर गौर नहीं करती तो समिति किसानों व बागवानों को संगठित कर आंदोलन करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *