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किसानों की हालत के लिए स्वयं कांग्रेसी जिम्मेदार – अमित ठाकुर

शिमला, 12 जनवरी-  भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष अमित ठाकुर ने कहा कि आज प्रदेश में कुछ जगह युवा कांग्रेस के एक गुट द्वारा थाली बजाने का ड्रामा किया गया। उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस को सही मायने में थाली अपने कांग्रेस के नेताओं के लिए बजानी चाहिए क्योंकि आज किसानों की जो हालत है उसके लिए स्वयं कांग्रेसी जिम्मेदार है।

2006 में जब नंदीग्राम एवं सिंगूर में  नैनो प्लांट लगाए जाने के वक्त किसानों पर जब अत्याचार हो रहा था तब कांग्रेस कहां थी।
उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस दयनीय स्थिति में है और चंद मुट्ठी भर युवाओं द्वारा प्रदर्शन किया गया। ऐसा केवल कांग्रेस में ही संभव है कि एक मोर्चे के एक से अधिक अध्यक्ष बनते हैं।

उन्होंने कहा कि देश भर में नरेंद्र मोदी सरकार ऐसी पहली सरकार है जो किसान हित में कार्य कर रही है किसान हित में अनेकों योजनाएं बनाई जा रही है और किसानों को चौतरफा लाभ पहुंचाया जा रहा है उन्होंने कहा जो किसान धरने पर बैठे हैं वह तो किसान अभी नहीं ।

उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पूरी गंभीरता से किसानों के कल्याण एवं उनकी भलाई के लिए कटिबद्ध है। विगत छः वर्षों में किसानों की भलाई के जितने काम मोदी सरकार ने किये हैं, उतने किसी और ने नहीं किये, साथ ही हमारी सरकार देश के हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध है।

उन्होंने कहा सरकार पहले दिन से यह कह रही थी कि एक कमिटी बनाई जाय जिसमें आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हों, वह कमिटी बिंदुवार कृषि कानूनों का अध्ययन करे और जहां भी उचित संशोधन की जरूरत हो, उसे प्रस्तावित करें जिस पर सरकार अमल करने को तैयार है। आज माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी हमारे इस स्टैंड को अनुमोदित किया है।

उन्होंने कहा सरकार ने भी किसान संगठनों से बैठक में कई बार यह आग्रह किया था कि कोविड के कारण महिलाओं और बच्चों को इस आंदोलन से घर भेज दिया जाए, सुप्रीम कोर्ट ने भी आज किसान संगठनों से ऐसी ही अपील की है।

उन्होंने कहा सरकार ने किसान संगठनों से अपील करते हुए कहा था कि आप हाइवे को छोड़ कर अन्य वैकल्पिक जगहों पर अपना आंदोलन जारी रखें, किसान संगठनों को प्रदर्शन के लिए सरकार ने वैकल्पिक जगह भी मुहैया कराई थी, गृह मंत्री जी ने स्वयं किसान संगठनों से बात की थी। आज सुप्रीम कोर्ट ने भी आंदोलनरत किसान संगठनों से यही अपील की है।

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