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करसोग में प्राकृतिक खेती पर शिविर: किसानों को दिए कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के टिप्स

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मंडी, सितंबर 23: हिमाचल में जिला मंडी के तहत करसोग में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। यहां शुक्रवार को ग्राम पंचायत सांवीधार के अंतर्गत कलंगार में संपन्न हुए शिविर में किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। जिसमें महिलाओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। इस दौरान किसानों को सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की तकनीक में उपयोग होने वाले घटक जीवामृत घन जीवामृत बीजामृत दशपर्णी अर्क व खट्टी लस्सी के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। यही नहीं किसानों को कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए उक्त घटकों को तैयार करने की विधि भी बताई गई। इस दो दिवसीय शिविर में विकासखंड चुराग के तकनीकी प्रबंधक बंटी कुमार, सहायक तकनीकी प्रबंधक गौरव व हिमेंद्र सहित मास्टर ट्रेनर भीम सिंह ने किसानों को बताया गया जहर युक्त रसायनिक खेती को छोड़कर किसान प्राकृतिक खेती की तकनीक को अपनाकर कम लागत में अधिक मुनाफा ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि फसलों में जीवामृत, घनजीवामृत व बीजामृत आदि के छिड़काव से कृषि पैदावार पर आने वाली लागत काफी घटी हैं। जिससे किसानों के लिए खेती अब मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। ऐसे में कृषि विभाग ने अधिक से अधिक संख्या में किसानों को सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती से जुड़ने की अपील की है। ताकि किसान आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकें और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का जीवन स्तर और बेहतर हो सके। इस शिविर पंचायत के अंतर्गत पड़ने वाले विभिन्न गांव के किसानों ने भाग लिया।

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