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राज्य मनोरोग अस्पताल बदहाल

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शिमला। हिमाचल प्रदेश राज्य मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा है कि राज्य मनोरोग अस्पताल में न तो कोई  मनोचिकित्सक है और न ही काउंसिलिंग और योग और ध्यान की व्यवस्था। पुरुषों और महिलाओं के वार्ड में सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे हैं। ओक्युपेशनल थेरेपी और फिजीयोथेरेपी की व्यवस्था भी नहीं है।

उन्होंने मुख्य सचिव आरडी धीमान को लिखे एक पत्र में इस अस्पताल पर तुरंत ध्यान देने की मांग की है।

गौरतलब है कि आजकल अस्पताल एक वार्ड आया द्वारा महिला मनोरोगी की पिटाई को लेकर चर्चा में है। राज्य मानवाधिकार आयोग ने शिवालिक इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग की छात्रा सुदर्शली पराशर की शिकायत पर मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा की 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने राज्य मनोरोग अस्पताल में हुए कार्यक्रम में सरकार और समाज को मनोरोगियों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी थी। इसके बावजूद राज्य के एकमात्र मनोरोग अस्पताल पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि पिछले लगभग पांच महीने से वहां पर कोई मनोचिकित्सक तैनात नहीं है। हफ्ते में एक दिन आईजीएमसी अस्पताल से एक मनोचिकित्सक वहां आता है। मनोरोगियों के लिए मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग आवश्यक होती है। जबकि यह सुविधा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। यह भी सिद्ध हो चुका है कि मानसिक रोगियों के लिए योग और मेडिटेशन अत्यंत लाभदायक होते हैं। लेकिन अस्पताल इस सुविधा से भी वंचित है।

गौरतलब है कि आजकल राज्य मनोरोग अस्पताल में 43 पुरुष और 13 महिला मनोरोगी भर्ती हैं। दो महिला मनोरोगी आजकल छुट्टी पर घर गई हुई हैं। अस्पताल में चार सामान्य मेडिकल ऑफिसर हैं और एक दांतो का डॉक्टर है।

राज्य मानवाधिकार आयोग में छात्रा सुदर्शली पाराशर ने यह आरोप भी लगाया है कि अस्पताल में भर्ती मनोरोगियों को रोजगार मिले हुए कपड़े नहीं पहनाए जाते और उनमें जुओं की समस्या आम है। यह भी आरोप है कि मनोरोगियों के कपड़ों की धुलाई लॉन्ड्री में ठीक से नहीं की जाती है।

प्रो. अजय श्रीवास्तव ने मुख्य सचिव से अस्पताल में तुरंत मनोचिकित्सक की तैनाती और सभी वार्ड में कैमरे लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मनोरोगियों की काउंसलिंग, योग और मेडिटेशन के साथ ही एक मंदिर की व्यवस्था भी की जानी चाहिए ताकि वे तनाव से मुक्त हो सकें।

Samagra Sikhsha

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