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सरकार का किसान विरोधी चेहरा स्पष्ट – संजय

शिमला, दिसंबर 23 – आज राष्ट्रीय किसान दिवस पर किसान संगठनों के आह्वान पर किसान संघर्ष समिति, किसान सभा व अन्य संगठनों के द्वारा आज प्रदेश भर में प्रदर्शन किए तथा अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया। किसानों के द्वारा दिल्ली मे चलाए जा रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए इस ज्ञापन में मांग की गई है कि तीनो किसान बिलों को निरस्त करने को लेकर किसानों की मांग को तुरंत स्वीकार करे तथा इस किसान आंदोलन को बातचीत कर समाप्त करवाये। केंद्रसरकार नेअदानी अंबानी जैसे बड़े कॉरपोरेट घरानों व अग्रि बिज़नेस कंपनियों के दबाव में आकर इन तीनों किसान विरोधी काले क़ानूनों को लाए हैं जो भविष्य में किसानों को मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) को समाप्त कर कॉरपोरेट घरानों के माध्यम से ठेका खेती को बढ़ावा दे रही है। किसान पिछले 23 दिनों से कड़ाके की ठंड में आंदोलन कर रहें हैं पर सरकार किसानों की बात सुनने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है इसके उलट सरकार इन तीनों कृषि क़ानूनों को जायज़ ठहराने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। जिससे सरकार का किसान विरोधी चेहरा स्पष्ट हुआ है। इस ज्ञापन में निम्न माँगो को सम्मिलित किया गया है।

1. तीन कृषि क़ानूनों को केंद्र सरकार निरस्त करे व विद्युत संशोधन अधिनियम, 2020 को तुरंत वापिस ले।
2.राज्य सरकार 2014 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हिमाचल की जनता को किये गए वायदों के अनुसार प्रदेश के उत्पादों सब्ज़ियों, फूल, मसलों, ऊन, दूध, शहद आदि पर डॉ. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक समर्थन मूल्य की घोषणा करे।
3. किसानों व बागवानों के खरीदारों व आढ़तियों के पास फंसे पैसों का भुगतान तुरंत करवाया जाए व दोषी खरीददारों व आढ़तियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जाए।
4. किसानों व बागवानों को सरकार द्वारा कृषि व बागवानी विभाग से जो सब्सिडी प्रदान की जाती थी उसको जारी रखे व इसको समाप्त करने के निर्णय को तुरन्त वापिस ले। किसानों व बागवानों की पिछले लंबे समय से लंबित सब्सिडी उनको तुरंत दी जाए।
5. एच.पी.एम.सी व हिमफेड द्वारा बागवानों से खरीदे सेब का बकाया भुगतान तुरंत नकद में किया जाए।
6.प्रदेश सरकार मक्की सहित फलों और सब्जियों के लिए सरकारी क्षेत्र में भंडारण केन्द्र, शीत भंडारण केंद्र व प्रसंस्करण इकाइयों का निर्माण करे।

सरकार यदि तुरन्त इन मांगों पर अमल नहीं करती है तो किसान संघर्ष समिति किसानों को संगठित कर आंदोलन को तेज करेगी।

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