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बच्चों को शुरू से योग और प्राणायाम से जोड़ें

शिमला, 02 जनवरी –  प्रदेश के लोगों को ठंड के इस मौसम में अपने स्वास्थ्य की बागडोर अपने हाथ में लेनी होगी। यह बात शनिवार को शिमला में एक पत्रकार वार्ता के दौरान श्री श्री योग की अंतरराष्ट्रीय निदेशक व भारतीय योग संघ की महासचिव कमलेश बरवाल ने कहीं। उन्होंने कहा कि यदि हम रोजाना आधा घंटा योग प्राणायाम को समय दें तो खुद को बहुत सी बीमारियों से दूर रख सकते हैं उन्होंने प्रदेश के लोगों से आह्वान किया कि वह अपने बच्चों को शुरू से योग और प्राणायाम से जोड़ कर रखें।

कमलेश बरवाल ने कहा कि अब तक करीब 1700 से 1800 शोध हुए हैं जिसमें सिद्ध किया गया है कि योग प्राणायाम और ध्यान से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा मानसिक तनाव कम होता है। उन्होंने सूर्य नमस्कार ,धनुरासन, पवनमुक्तासन, वक्रासन और कपाल भारती जैसे योग प्राणायाम को अपने जीवन में ढालने का प्रयास करने की बात कही।

खास तौर पर शिमला पहुंचे आयुर्वेदा विशेषज्ञ डॉ अभिषेक ने इस दौरान मीडिया को आयुर्वेदा के बारे में विस्तृत जानकारी। उन्होंने कहा की आयु और वेद से बना आयुर्वेद एक जीवन शैली है जबकि इसे एक पद्धति तक ही सीमित रखा जाता है।

डॉ अभिषेक ने कहा कि वेदों में पहली ही पंक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता का जिक्र किया गया है कि प्रकृति में असंतुलन के कारण रोग पैदा होते हैं। उन्होंने बताया कि वात वृद्धि से 80 प्रकार के, पित्त वृद्धि से 40 प्रकार के और कफ वृद्धि से 20 प्रकार के रोग पैदा होते हैं। उन्होंने रोग मुक्त होने के लिए दिनचर्या, रितु चर्या और रसायन सेवन पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अमृत, टर्मरिक प्लस,कबसुर कुडिनीर, शक्ति ड्राप, तुलसी अर्क और च्यवनप्राश शिमला में श्री श्री के अलग अलग स्टोर में उपलब्ध हैं और इन्हें आनलाईन भी मंगवाया जा सकता है।

आर्ट्स ऑफ लिविंग की राज्य मीडिया समन्वयक तृप्ता शर्मा ने प्रेस वार्ता में बताया कि कोरोना काल में आर्ट ऑफ लिविंग ने जरूरतमंदों और गरीबों में सरकार व प्रशासन के सहयोग से राशन व अन्य आवश्यक वस्तुएं वितरित की ,साथ ही अग्रीम पंक्ति में खड़े कोरोना योद्धाओं के लिए 500 से अधिक निशुल्क आॅनलाईन कोर्सिज आयोजित किए ताकि वे तनाव मुक्त रह सके।

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