स्वस्थ बच्चे ही स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र की आधारशिला: हेमराज बैरवा
बच्चों के पोषण को मजबूत करने के लिए कांगड़ा में शुरू हुआ ‘मिशन भरपूर 2.0’
सीएसआाईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित पोषण उत्पादों का बच्चों को मिलेगा लाभ
धर्मशाला, 6 अक्तूबर: बच्चों में कुपोषण की रोकथाम तथा उनके समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला प्रशासन कांगड़ा के सहयोग से रक्कड़ (धर्मशाला) से ‘मिशन भरपूर 2.0’ का शुभारंभ किया गया। उपायुक्त ने कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि भाग लिया और मिशन भरपूर का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने कहा कि हमारा विश्वास है कि स्वस्थ बच्चे ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र की आधारशिला हैं। आज के नौनिहाल ही देश की आने वाली पीढ़ी हैं और यदि उन्हें बचपन से ही उचित पोषण, स्वास्थ्य और बेहतर वातावरण मिले, तो वे आगे चलकर समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे।
बच्चों का पोषण केवल सरकार या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक माता-पिता और परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली और एकल परिवारों की बढ़ती संख्या के कारण कई बार बच्चों को वह समय और व्यक्तिगत ध्यान नहीं मिल पाता, जो उनके समुचित विकास के लिए आवश्यक है। ऐसे में वैज्ञानिक अनुसंधान और पारंपरिक पोषण पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘मिशन भरपूर’ इसी दिशा में एक अभिनव पहल है, जिसके तहत बच्चों को स्वादिष्ट एवं पोषणयुक्त सप्लीमेंट्री उत्पाद उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये उत्पाद बच्चों के मुख्य भोजन का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक आहार हैं। बच्चों को घर पर संतुलित एवं पौष्टिक भोजन देने के साथ इन उत्पादों का निर्धारित तरीके से उपयोग किया जाना चाहिए।
उपायुक्त ने अभिभावकों से बच्चों को पर्याप्त समय देने और मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग को कम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ खेलना, बातचीत करना, उन्हें बाहर घुमाना और उनकी गतिविधियों पर ध्यान देना उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बच्चों के पोषण के साथ-साथ उनके विकासात्मक पड़ावों पर भी माता-पिता को नियमित रूप से नजर रखनी चाहिए। उन्होंने मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन (एमसीपी) कार्ड के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस कार्ड में बच्चे के पोषण, स्वास्थ्य और विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध होती है। अभिभावकों को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दी जाने वाली जानकारी को गंभीरता से लेना चाहिए तथा बच्चे के विकास में किसी प्रकार की कमी या देरी दिखाई देने पर समय रहते विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए।
उपायुक्त ने कहा कि इन उत्पादों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि बच्चे उन्हें आसानी से और रुचि के साथ ग्रहण कर सकें। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं अभिभावकों से आग्रह किया कि उत्पादों का सही तरीके से संरक्षण एवं उपयोग सुनिश्चित करें, ताकि बच्चों को इसका पूरा पोषण लाभ मिल सके।
सीएसआाईआर-आईएचबीटी के निदेशक सुदेश यादव ने बताया कि संस्थान द्वारा बच्चों के लिए ऐसे पोषण उत्पाद विकसित किए गए हैं, जिनमें आवश्यक आयरन, जिंक, कैल्शियम, प्रोटीन सहित विभिन्न पोषक तत्व वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में इन उत्पादों का उपयोग 2 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के साथ किया गया और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। इन परिणामों के आधार पर अब इस पहल को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
सुदेश यादव ने कहा कि सीएसआईआर-आईएचबीटी की वैज्ञानिक टीम इस पहल के क्रियान्वयन में आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर किसी प्रकार की आवश्यकता या कमी महसूस होने पर विभाग एवं वैज्ञानिक टीम को अवगत करवाया जाए, ताकि आवश्यक सुधार और सहयोग उपलब्ध करवाया जा सके।
इस अवसर जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) अशोक शर्मा ने कहा कि ‘मिशन भरपूर’ से पहले चरण में 2 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुपोषित एवं अति-कुपोषित बच्चों को वैज्ञानिक रूप से विकसित पोषण उत्पाद उपलब्ध करवाए गए थे। इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए और बच्चों के पोषण स्तर तथा स्वास्थ्य मानकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए अब 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए भी उपयुक्त पोषण उत्पाद उपलब्ध करवाने की दिशा में कार्य किया गया है।

