केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. योगिंदर सिंह वर्मा ने एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के नए छात्रों को दिया सफल इंसान बनने का मंत्र,
नए छात्र-ओरिएंटेशन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि की शिरकत
शिमला, अगस्त 12
आज विश्व में लोग अपने जीवन को बदलना चाहते हैं, जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं, जीवन में परिवर्तन केवल प्रवृति के परिवर्तन से नहीं, जीवन का परिवर्तन व्यक्ति के नज़रिए से होता है। उक्त पंक्तियां शुक्रवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश धर्मशाला के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. योगिंदर सिंह वर्मा ने एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के नए छात्र-ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान छात्रों और शिक्षकों से शिक्षा का उद्देश्य और जीवन में सफलता विषय पर कही। विश्वविद्यालय में बारह अगस्त से नए-शैक्षणिक सत्र का आग़ाज़ हो चुका है। इस अवसर पर प्रो. योगिंदर वर्मा ने इस कार्यक्रम में बतौर वशिष्ठ मुख्य अतिथि व मुख्य वक़्ता शिरकत कर नए छात्रों और विश्वविद्यालय के शिक्षकों से रूबरू हुए और बेहतरीन शिक्षा से विश्व व मानव जीवन के सामने खड़ी चुनौतियों से कैसे निपटा जाए और जीवन में शिक्षा कैसी हो इन तमाम विषयों पर व्याख्यान दिया। विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश होते ही एनसीसी कैडेटों ने प्रो. योगिंदर वर्मा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया और एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. रमेश चौहान, कुलसचिव बलराम झा, कार्यकारी अधिकारी ज्योत्सना शर्मा, विश्वविद्यालय अधिकारी माइकल फिन्देल, डीन अकादमिक डॉ. अनिल कुमार पॉल, प्रो. नील सिंह, डॉ. अंकित ठाकुर, प्रो. रोहिणी धड़ेला, परीक्षा नियंत्रक अफ़ज़ल खान, विश्वविद्यालय के सलाहकार इंजीनियर सुमन विक्रांत, डीन व विभागाध्यक्षों और शिक्षकों ने गर्मजोशी से प्रो. वर्मा का स्वागत किया। वहीं कुलपति प्रो. डॉ. रमेश चौहान ने प्रो. योगिंदर वर्मा को हिमाचली पहाड़ी टोपी व शॉल भेंट कर स्वागत किया। कुलपति प्रो. डॉ. रमेश चौहान ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रो. डॉ. योगिंदर वर्मा एक उच्च कोटि के शिक्षाविद हैं जिन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में कुलपति और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन, नैक और कई उच्च शिक्षण संस्थानों और आयोगों में अपनी सेवाएं दी हैं और आज भी शिक्षा के क्षेत्र में नव पीढ़ी को बेहतरीन शिक्षा और बेहतरीन इंसान बनने का मूलमंत्र दे रहे है। कुलपति चौहान ने कहा कि एपीजी शिमला विश्वविद्यालय व छात्रों और नौजवान फैकल्टी के लिए प्रो. वर्मा का संदेश नए नवाचारों से सफल इंसान बनने की ओर अग्रसर करता है ताकि बेहतरीन शिक्षा से समाज, राष्ट्र और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके। कुलपति चौहान ने नए छात्रों को बेहतरीन ढंग से पढ़ाई करने की सुभकानाएँ दीं। मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. योगिंदर वर्मा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अक्षरज्ञान की अपेक्षा संस्कार, बेहतरीन चरित्र, व्यक्ति का साकारात्मक नज़रिया, मानव-सेवा, प्रकृति से सीख, मौलिक ज्ञान, सच्चे माता-पिता व गुरुजनों, प्रेम, कर्मठता-भाव, नवाचार और शिक्षा का मूल उद्देश्य अधिक महत्वपूर्ण है। प्रो. वर्मा ने कहा कि आज नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की क्यों जरूरत पड़ी, सिर्फ नौकरी पाने के लिए या धन अर्जन करने के लिए, उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का साधन नहीं न ही यह धन अर्जन का तंत्र है, बल्कि यह इंसान का सर्वांगीण विकास का जरिया है जिससे से समाज और लोगों में मानव मूल्यों और प्राकृतिक संसाधनों से बेहतरीन इंसान बनाया जा सके। प्रो. वर्मा ने कहा कि यह तभी संभव है जब विश्व का मानव शिक्षा से चरित्रवान, संस्कारवान, कर्मठ कर्म की अभिलाषा, बेहतरीन स्किल्स और समय प्रबंधन वाला हो और मानव की बेहतरी वाला व खुशाल जीवन जीने का रास्ता दिखाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा मानव जीवन का अनुशासन है जो मानव की मनःस्थिति को नई सोच से पहले मनुष्य को आदर्श इंसान बनाती है और श्रेष्ठ तरीकों से इंसान को जीवन के उतार-चढ़ाव में जीना सीखती है और आज ऐसी ही शिक्षा की जरूरत सभी विकसित और अविकसित देशों द्वारा महसूस की जा रही है क्योंकि विश्व में शिक्षा से संस्कार, संस्कृति, निपुणता के गुण, व्यहवारिक ज्ञान, चरित्रनिर्माण की शिक्षा, प्रकृति और मनावनेकी शिक्षा के सूत्रों को वर्तमान अक्षरज्ञान वाली शिक्षा में भुला दिया जा रहा है जबकि शिक्षा के असली उद्देश्य से वर्तमान पीढ़ी अनभिज्ञ होकर असली तालीम से दूर होते जा रहें हैं और यह वजह है कि विश्व आज कई तरह की सामाज़िक, आर्थिक, राजनीतिक और मानव विकास की चुनौतियों से सामना करने में असमर्थ हो रहा है। इस छात्र-ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने मुख्य अतिथि प्रो. वर्मा से सफल इंसान बनने और शिक्षा से जुड़े कई प्रश्न किये जिनका मुख्य अतिथि ने बेहतरीन तरीके से छात्रों को उत्तर देकर उनका मार्गदर्शन किया और अपने को गौरवान्वित समझा। मुख्य अतिथि प्रो. योगिंदर वर्मा ने एपीजी शिमला विश्वविद्यालय की ओर से आज़ादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को भी कार्यक्रम के अंत में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की सामाप्ति एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलसचिव बलराम झा के धन्यवाद ज्ञापन से हुई। बलराम झा ने मुख्य अतिथि प्रो. योगिंदर वर्मा का कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि व मुख्य वक़्ता होने के लिए धन्यवाद किया, वहीं झा ने सभी नए छात्रों और विश्वविद्यालय के प्रबंधन, कुलपति रमेश चौहान और सभी विभागीं के विभागाध्यक्षों, डीन, शिक्षकों और इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम की संचालिका रही डॉ. प्राची वैद का धन्यवाद किया। इस दौरान रंगोलो प्रतियोगिता भी आयोजित की गई जिसमें लॉ की छात्रा सुमनिमा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

