स्वायत्तता की आवाज, 14वें दिन भी बुलंद
शिमला, 15 सितंबर 2026
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा की रक्षा की मांग को लेकर HPUTWA का ‘विश्वविद्यालय बचाओ अभियान’ 14वें दिन भी जारी रहा। मंगलवार को शिक्षकों ने कुलपति कार्यालय के बाहर धरना देकर विश्वविद्यालय की स्वतंत्र पहचान, स्वायत्तता और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली को बनाए रखने की मांग को मजबूती से उठाया।
इस अवसर पर प्रो. विजय शर्मा, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. सुनील, डॉ. योगराज (उपाध्यक्ष, HPUTWA), डॉ. अंजली शर्मा (संयुक्त सचिव, HPUTWA) तथा डॉ. अंकुश भारद्वाज (सचिव, HPUTWA) ने अपने विचार रखे।
प्रो. विजय शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और अकादमिक स्वतंत्रता उसकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं शोध व्यवस्था के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय संस्थागत प्रक्रियाओं और विश्वविद्यालय समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए लिए जाने चाहिए।
डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं, बल्कि दशकों के शैक्षणिक परिश्रम, शोध और अकादमिक परंपराओं से निर्मित संस्थान है। विश्वविद्यालय की स्वायत्तता ही उसकी प्रभावी और स्वतंत्र कार्यप्रणाली का मूल आधार है। इसे कमजोर करने वाला कोई भी कदम विश्वविद्यालय के हित में नहीं हो सकता।
डॉ. सुनील ने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति के लिए शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की समस्याओं का समाधान संवाद, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संस्थागत स्तर पर किया जाना चाहिए।
डॉ. योगराज, उपाध्यक्ष HPUTWA, ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता उसकी पहचान और गरिमा से जुड़ी हुई है। शिक्षकों की मांगें किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की स्वतंत्र एवं लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली की रक्षा के लिए हैं। उन्होंने कहा कि HPUTWA शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
संयुक्त सचिव डॉ. अंजली शर्मा ने कहा कि स्वायत्तता केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि यह शिक्षण, शोध, नवाचार और संस्थागत निर्णय लेने की अकादमिक स्वतंत्रता से सीधे जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को मजबूत बनाने के लिए संसाधनों, प्रयोगशालाओं, शोध सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ किया जाना चाहिए, न कि उसकी स्वतंत्र कार्यप्रणाली को प्रभावित किया जाना चाहिए।
सचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षक जवाबदेही, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के पक्षधर हैं, लेकिन जवाबदेही के नाम पर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से संबंधित निर्णय लोकतांत्रिक एवं संस्थागत प्रक्रियाओं के अनुरूप लिए जाने चाहिए। उन्होंने इस अभियान में लगातार सहयोग और सहभागिता के लिए सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने भी विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और गरिमा की रक्षा के इस अभियान में सहयोग देने के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है।
HPUTWA ने स्पष्ट किया कि ‘विश्वविद्यालय बचाओ अभियान’ विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थागत गरिमा की रक्षा के लिए है। 14वें दिन भी शिक्षकों की एकजुटता और शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहा।

