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मौनपालन व्यवसाय ने दुलैहड़ के जसबीर की बदली तकदीर

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जसबीर न केवल स्वयं बल्कि अन्य युवाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए कर रहे प्रेरित
शहद से स्वरोजगार की मिठास, एक साल में 50 टन शहद का उत्पादन करके जसवीर कमा रहे करोड़ों रूपए
ऊना – राज्य सरकार की योजनाएं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ अच्छी कमाई का जरिया बन रही हैं। प्रदेश सरकार की मदद व अपनी मेहनत से किसान इन योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं तथा अपने परिवार का बेहतर ढंग से भरण-पोषण कर रहे हैं।
हरोली के तहत दुलैहड़ गावं के निवासी जसबीर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री मधु विकास योजना का लाभ लेकर आज करोड़ों रुपए की कमाई कर रहे हैं। जसबीर बताते हैं कि पुश्तैनी व्यवसाय मौनपालन होने के चलते उन्होंने भी जमा दो की पढ़ाई करने के उपरांत इसी व्यवसाय को स्वरोजगार के रूप में चुना। जसबीर गांव के अन्य लोगों को भी इस व्यवसाय से जोड़कर रोजगार के साधन उपलब्ध करवा रहे हैं।
70 मधुमक्खी बॉक्सों से शुरू किया व्यवसाय, अब लगभग 550 बॉक्सों तक पहुंच चुका है
जसबीर ने बताया कि शुरूआत में उन्होंने 70 मधुमक्खी बॉक्सों के साथ मौन पालन का व्यवसाय को शुरू किया जोकि वर्तमान में 550 मधुमक्खी बॉक्सों  के करीब पहुंच गया हैं। उन्होंने बताया कि एक वर्ष में लगभग 50 टन शहद का उत्पादन कर रहे हैं। जसबीर कहते हैं मौन पालन का कार्य करने के लिए उन्हें प्रदेश सरकार द्वारा किसानों/बागवानों के लिए संचालित की जा रही मुख्यमंत्री मधुमक्खी पालन योजना के तहत एक लाख 76 हज़ार रूपए उपदान राशि मिली।
जसबीर को बी ब्रीडर कार्य के लिए भी बागवानी विभाग से उन्हें 3 लाख रूपए मिले। इस कार्य के लिए विभाग द्वारा उन्हें नौणी यूनिवर्सिटी सोलन में 21 दिन का प्रशिक्षण भी दिलाया गया।
स्थाई व अस्थाई रूप से दिया रोजगार
जसबीर ने मौन पालन के कार्य के लिए 4 व्यक्ति को स्थायी रोज़गार दे रखा है। इसके अतिरिक्त मधुमक्खियों के बॉक्सों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए वाहन और लेबर कार्य करने वाले लोग भी उनसे जुडे़ हुए हैं जिन्हें अस्थाई रूप से रोजगार मिलता है।
 
शहद विक्री के लिए अमराली में खोला है हनी प्रोसैसिंग यूनिट, कुरियर सुविधा भी उपलब्ध
जसबीर ने हनी को सेल करने के लिए हनी प्रोसैसिंग यूनिट अमराली में सत्संग घर के समीप स्थापित किया है जिसमें 50 ग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक की पैकिंग उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि 1 किलोग्राम हनी की कीमत 350 रूपये निर्धारित की गई है। इसके अलावा शहद मंगवाने के लिए कुरियर सुविधा भी उपलब्ध है। इसके लिए मोबाइल नम्बर 83509-29308 व व्हटसऐप नम्बर 83510-59589 पर शहद मंगवाने के लिए सम्पर्क कर सकते हैं।
विभिन्न कम्पनियां भी खरीद रही जसबीर से शहद
 जसबीर ने बताया कि शहद को बेचने के लिए उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता क्योंकि हितकारी, शक्ति एपीफूड, ब्रिज हनी व एमबी एग्ज़िम सहित अन्य कम्पनियां जसबीर से शहद खरीद रही हैं।
जसबीर बताते हैं कि मधुमक्खी पालन से अधिक कमाई के लिए वर्ष भर वह उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान व मार्च माह में पंजाब राज्यों का रुख करते हैं।
जसबीर का कहना है कि वर्तमान में उन्होंने हनी प्रोसैसिंग यूनिट लगाने के लिए बागवानी विभाग में आवेदन किया है। इस यूनिट की लागत 10 लाख रूपये है जिसमें 5 लाख रूपये की राशि सबसिड़ी के रूप में प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि बागवानी विभाग समय-समय पर बी किपिंग से संबंधित दवाईयों सहित अन्य उचित दिशा-निर्देश देते रहते हैं ताकि किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो।
उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवाओ से आहवान किया कि वे मौनपालन को व्यवसाय के रूप में चुनकर अपने लिए रोजगार के साधन सृजित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए संचालित की जा रही स्कीमों का लाभ लेने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री मधुविकास योजना पर दिया जा रहा उपदान – उपनिदेशक बागवानी
उद्यान विभाग ऊना के उप निदेशक संतोष बख्शी ने बताया कि मुख्यमंत्री मुध विकास योजना के प्रत्येक चरण में बागवानों/किसानों को सबसिड़ी की सुविधा प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री मधु विकास योजना का उद्देश्य किसानों को राज्य में मधुमक्खी उत्पादों के उत्पादन और मधुमक्खी पालन के लिये प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत मधुमक्खियों के 50 बॉक्सों के लिए 80 प्रतिशत सबसिड़ी विभाग के माध्यम से दी जाती है। मधुमक्खी पालन ऋण योजना के तहत मधुमक्खी पालन करने वाले लाभार्थी को सभी जरूरी सामग्री उपकरणों पर एक सेट प्रति लाभार्थी को 20 हज़ार रूपए प्रति इकाई की लागत पर 80 प्रतिशत अर्थात 16 हज़ार रूपए की सबसिडी प्रदान की जाती है।
उन्होंने बताया कि बागवान/किसान बी ब्रीडर की 300 मधुमक्खियों के बॉक्स तैयार करता है तो सरकार द्वारा 3 लाख रूपये की उपदान राशि दी जाती है। एक राज्य से दूसरे राज्य में मधुमक्खियों के बॉक्सों को माइग्रेट करने के लिए किसान/बागवान को साल में एक बार 10 हज़ार रूपये की ग्रांट प्रदान जाती है। उन्होंने बताया कि दीवारों पर एपिस सेराना नामक मधुमक्खी के छत्ते लगाने के लिए किसानों/बागवानों को प्रति दीवार एक हज़ार रूपये की ग्रांट मिलती है।
संतोष बख्शी ने बताया कि मौन पालन के कार्य से जुड़ने के लिए किसानों को बागवानी विभाग के माध्यम से बी किपिंग विशेषज्ञों के माध्यम से पांच दिवसीय प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। इसके अलावा सात दिवसीय टेªनिंग प्रोग्राम के तहत राज्य से बाहर बी किपिंग की एडवांस टेªनिंग लेने के लिए एक हज़ार रूपये की ग्रांट प्रति किसान भी प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि यदि कोई किसान/बागवान अधिकतम 50 लाख रूपये तक का बी किपिंग प्रोसैसिंग यूनिट स्थापित करता है तो उसे 25 लाख रूपये या न्यूनतम किसी भी बी किपिंग यूनिट लागत का 50 प्रतिशत राशि उपदान के रूप में दी जाती है।
उप-निदेशक संतोष बख्शी ने बताया कि जिला में 4 लोग बी ब्रीडर तथा लगभग 50 लोग मधुमक्खी पालन के व्यवसाय से जुडक़र आजीविका कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग मौन पालकों की हर प्रकार से सहायता करता है। उन्होंने कहा कि यदि मौन पालन में किसी प्रकार की समस्या आती है तो वह बागवानी विभाग के अधिकारियों के साथ संपर्क कर सकते हैं। विभाग के अधिकारी तत्परता के साथ उनकी सहायता करेंगे।

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