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एपीजी शिमला विश्वविद्यालय को फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया से मिला 3 नए विभाग संचालन की मान्यता

 

शिमला, दिसंबर 1

 

एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के विभिन्न संकाय व पाठ्यक्रमों के साथ शुक्रवार को स्कूल ऑफ फार्मेसी में बी. फार्मा के लिए 60 सीटें, डी. फार्मा के लिए 60 सीटें, कॉलेज ऑफ फार्मेसी में डी. फार्मा के लिए 60 सीटें और एक्सीलेंस कॉलेज ऑफ फार्मेसी में डी. फार्मा के लिए 60 सीटों के रूप में संचालन के लिए फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया की ओर से मान्यता मिली। कुल 240 फार्मेसी की सीटों में प्रवेश के लिए मौजूदा शैक्षणिक सत्र और 2024 से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र से प्रवेश आरंभ करने की मान्यता भी फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया की ओर से विश्वविद्यालय में फार्मेसी के पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ और विभिन्न लैबों की जाँच-परख के पश्चात फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया की विषय विशेषज्ञों ने अंतिम पड़ाव में फार्मेसी के विभिन्न पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए मोहर लगा दी। एपीजी शिमला विश्वविद्यालय शिमला ज़िला का पहला ऐसा निजी विश्वविद्यालय बन गया है जिसे फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने फार्मेसी के विभिन्न विषयों के संचालन की अनुमति दी है। बी. फार्मेसी और डी. फार्मेसी कोर्स की अवधि पूरा करने के बाद विद्यार्थी मेडिकल से जुड़े व्यवसाय के लिए लाइसेंस ले सकेंगे और अपना व्यवसाय भी कर सकेंगें।

एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. आर. एस. चौहान, कुलसचिव डॉ. अंकित ठाकुर, शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आनंदमोहन शर्मा और कार्यकारी अधिकारी ज्योत्स्ना शर्मा ने कहा कि दोनों कोर्स के लिए विश्वविद्यालय की ओर से फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया को आवेदन किया गया था जिसपर स्वीकृति दे दी है। उन्होंने कहा कि इन कोर्स के अभाव में शिमला ज़िला के विद्यार्थियों को अन्यत्र जाना पड़ता था।इसे देखते हुए एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में इन दोनों कोर्स की शुरुआत की गई । इससे पहले भी प्रदेश के बहुत छात्र बी. फार्मेसी और डी. फार्मेसी कोर्स में प्रवेश के लिए आवेदन व मांग किया करते थे। उन्होंने कहा कि अब शिमला ज़िला सहित प्रदेश के युवाओं को बी. फार्मा और डी.फार्मा कोर्स करने के बाद फार्मेसी में उच्च शिक्षा के लिए, फार्मा कंपनियों में शोध, उत्पादन, गुणवत्ता परीक्षण, अकादमिक कार्य और फार्मेसी में अपना व्यवसाय शुरू करने के अवसर मिलेंगे। कुलपति चौहान ने कहा कि विश्वविद्यालय में आधुनिक तकनीक वाली लैबें हैं और विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर मुख्य फोकस किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में बनने जा रहें बल्क ड्रग पार्क में काम करने और फार्मेसी के क्षेत्र में रोज़गार के अवसर युवाओं को मिलेंगे जब उनके पास फार्मेसी में महारत के साथ डिग्री और डिप्लोमा होगा। इस सपने को पूरा करने के लिए एपीजी शिमला विश्वविद्यालय प्रशासन वचनबद्ध है। वहीं शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आनंद मोहन का कहना है कि फार्मा से जुड़े कोर्स के लिए हर साल विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों और ज़िलों में जाना पड़ता है।

प्रो. शर्मा ने कहा कि बी. फार्मेसी कोर्स 4 साल का डिग्री कोर्स है जबकि डी. फार्मेसी 2 साल का डिप्लोमा कोर्स है।

एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अंकित ठाकुर और कार्यकारी अधिकारी ज्योत्स्ना शर्मा का कहना है डी.फार्मा और बी. फार्मा कोर्स के बाद विद्यार्थी आत्मनिर्भर बन सकते हैं। इसके अलावा उन्हें सरकारी, निजी अस्पताल, सेना में फार्मासिस्ट के पद पर नियुक्ति का अवसर भी मिल सकता है। फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया की ओर से अनुमति व मान्यता मिलने के बाद कैंपस में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक-स्टाफ, प्रशासन और विद्यार्थियों में खुशी है।वहीं एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के चांसलर इंजीनियर सुमन विक्रांत ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों व प्रशासन के प्रयासों के लिए बधाई दी है।

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