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सुख-आश्रय के सहारे करनदीप ने लिखी सफलता की ‘रॉयल लुक’ कहानी

मुख्यमंत्री सुक्खू की संवेदनशील पहल बनी संबल, 2 लाख की सहायता से खोला ‘रॉयल लुक’ सैलून, अब हर माह 30 से 35 हजार रुपये की आमदनी

ऊना, 21 सितंबर. महज तीन महीने की उम्र में मां का साया उठ गया और पांचवीं कक्षा में पढ़ते हुए पिता भी चल बसे। जिंदगी की इन कठिन परिस्थितियों के बीच 24 वर्षीय करनदीप आज अपनी मेहनत और मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना से मिले सहारे के बल पर आत्मनिर्भर हैं। योजना के तहत वर्ष 2026 में मिली दो लाख रुपये की सहायता से उन्होंने ऊना के रामपुर में अपना हेयर सैलून शुरू किया। आज ‘रॉयल लुक’ से उन्हें हर माह 30 से 35 हजार रुपये की आमदनी हो रही है और वे चार युवाओं को भी हेयर सैलून का काम सिखा रहे हैं।

हरोली उपमंडल के रोड़ा गांव निवासी करनदीप तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। पिता लुधियाना में हलवाई का काम करते थे। माता-पिता के निधन के बाद बड़ी बहनों ने सिलाई-कढ़ाई का काम करके करनदीप की परवरिश की।

12वीं के बाद करनदीप ने हेयर सैलून का काम सीखना शुरू किया। वर्ष 2019-20 में करीब दो साल तक गुरुग्राम में काम सीखा। इसके बाद वर्ष 2021 से 2024 तक ऊना और वर्ष 2024-25 में हरोली में काम करते हुए अनुभव हासिल किया। इसी दौरान अपना व्यवसाय शुरू करने की तैयारी भी करते रहे।

करनदीप को मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के बारे में आईसीडीएस विभाग के माध्यम से पता चला। वर्ष 2025 में योजना के तहत उन्हें हर माह चार हजार रुपये का भत्ता मिलने लगा। अपने हुनर को कारोबार में बदलने की दिशा में वे आगे बढ़ रहे थे। वर्ष 2026 में व्यवसाय शुरू करने के लिए योजना के तहत दो लाख रुपये की सहायता मिली तो वर्षों से संजोए अपने कारोबार के सपने को आकार देने का अवसर मिल गया। फरवरी 2026 में उन्होंने ऊना के रामपुर में किराये की दुकान ली और ‘रॉयल लुक’ नाम से अपना हेयर सैलून शुरू कर दिया।

सैलून शुरू करने के लिए मिली सहायता से उन्होंने करीब 1.40 लाख रुपये सामान खरीदने पर खर्च किए, जबकि शेष 60 हजार रुपये से अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कीं। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन मेहनत और वर्षों में अर्जित अनुभव के दम पर काम धीरे-धीरे चल निकला।

करनदीप बताते हैं कि आज ‘रॉयल लुक’ से वे हर माह करीब 30 से 35 हजार रुपये कमा रहे हैं। जिस हुनर ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया, अब वही वे दूसरे युवाओं तक भी पहुंचा रहे हैं। वर्तमान में वे चार युवाओं को हेयर सैलून का काम सिखा रहे हैं और उन्हें करीब दो-दो हजार रुपये प्रतिमाह दे रहे हैं। इनसे पहले एक युवक यहां काम सीखने के बाद दुबई चला गया है।

करनदीप की दोनों बहनों की शादी हो चुकी है। अब उनका ध्यान अपने कारोबार को आगे बढ़ाने पर है। वे रामपुर में शुरू किए गए छोटे से सैलून को बड़ा करना चाहते हैं, ताकि कारोबार का विस्तार होने के साथ-साथ और युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार का अवसर मिल सके। करनदीप कहते हैं कि जिस सहारे ने उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया, उसके लिए वे मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के आभारी हैं।

सीएम की संवेदनशील सोच का सुफल
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की संवेदनशील सोच से शुरू की गई मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना विशेष देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों और युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है। योजना के तहत पात्र बच्चों और युवाओं को हर माह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता के साथ-साथ स्वरोजगार शुरू करने के लिए दो लाख रुपये की सहायता सहित उनके शिक्षा, कौशल विकास और भविष्य को संवारने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग उपलब्ध करवाया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का कानूनी दर्जा देकर उनके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली है।

उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना का लाभ प्रत्येक पात्र बच्चे तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी पात्र बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे।

Samagra Sikhsha

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